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Showing posts from September, 2025

ସାଧାରଣ ବଣ୍ଟନ ବ୍ୟବସ୍ଥା (PDS)

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 ସାଧାରଣ ବଣ୍ଟନ ବ୍ୟବସ୍ଥା (PDS) :- ଦଶ ବର୍ଷରୁ ଅଧିକ ସମୟ ପରେ ଜାତୀୟ ନମୁନା ସର୍ବେକ୍ଷଣ (NSS) କାର୍ଯ୍ୟାଳୟ ଦ୍ୱାରା ଫେବୃଆରୀ 2024 ରେ କରାଯାଇଥିବା ଏକ ଘରୋଇ ଉପଭୋଗ ସର୍ଭେର ପ୍ରକାଶନ, ଭାରତରେ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ହାର ଆକଳନ କରିବା ସମ୍ଭବ କରିଛି। ଏପ୍ରିଲ 2025 ରେ ବିଶ୍ୱ ବ୍ୟାଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପ୍ରକାଶିତ ଏପରି ଏକ ଆକଳନ ସବୁଠାରୁ ଅଧିକ ଧ୍ୟାନ ପାଇଛି। ଏହା ବର୍ତ୍ତମାନ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ହାର ବହୁତ କମ୍ ଥିବା ସୂଚାଇଥାଏ। ବିଶ୍ୱ ବ୍ୟାଙ୍କର ଉଦ୍ଧୃତି ଅନୁଯାୟୀ, "ଗତ ଦଶ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ, ଭାରତ ଦାରିଦ୍ର୍ୟକୁ ଉଲ୍ଲେଖନୀୟ ଭାବରେ ହ୍ରାସ କରିଛି। ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ (ପ୍ରତିଦିନ $2.15 ରୁ କମ୍ ରୋଜଗାର) 2011-12 ରେ 16.2 ପ୍ରତିଶତରୁ ହ୍ରାସ ପାଇ 2022-23 ରେ 2.3 ପ୍ରତିଶତକୁ ହ୍ରାସ ପାଇଛି...." ('Poverty and Equity Brief: INDIA', 2025)। ଯଦି ଏହା ପ୍ରକୃତରେ ଏକ ସଠିକ୍ ବର୍ଣ୍ଣନା, ତେବେ ଏହା ସନ୍ତୋଷର ଏକ ଉତ୍ସ ହେବ, କାରଣ ଏହା ସୂଚାଇ ଦିଏ ଯେ ଦେଶରୁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ପ୍ରାୟତଃ ଲୋପ ପାଇଛି। 'ଥାଲି ଭୋଜନ' ଏକ ଉପଭୋଗ ମାପକ ଭାବରେ ଅଧା ଶତାବ୍ଦୀ ପୂର୍ବରୁ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପ୍ରବର୍ତ୍ତିତ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ମାପକାଠି ପାଇଁ ପାରମ୍ପରିକ ପଦ୍ଧତି, ପ୍ରଥମେ ଏକ ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ କ୍ୟାଲୋରିଫିକ୍ ମୂଲ୍ୟର ଖାଦ୍ୟ ଗ୍ରହଣକୁ ସକ୍ଷମ କରିବ ଏପରି ଆୟ ନିର୍ଣ୍ଣୟ କରିବା ଏବଂ ତା'ପରେ କମ୍ କ...

हाइब्रिड बीज कैसे बनते हैं जानें

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 #देशी बीजों से #हाइब्रिड बीज कैसे बनते हैं जानें:- हाइब्रिड बीज कैसे बनते है:- 1. दो अच्छे पौधों का चयन ÷ #वैज्ञानिक या बीज विशेषज्ञ दो ऐसे पौधों को चुनते हैं जिनमें अलग-अलग अच्छे गुण हों। जैसे, एक पौधा ज्यादा फसल देता हो और दूसरा बीमारियों से लड़े। इन दोनों को मिलाकर एक नया पौधा बनाया जाता है। 2. परागण (क्रॉस-पॉलिनेशन)  ÷ एक पौधे के पराग (फूल का नर हिस्सा) को दूसरे पौधे के मादा हिस्से में डाला जाता है। यह काम हाथ से या खास तकनीकों से किया जाता है। ताकि सही मिश्रण हो। 3. संकर बीज बनाना  ÷ इस मिलन से जो बीज बनते हैं, वे हाइब्रिड (संकर) #बीज कहलाते हैं। इनमें दोनों पौधों के अच्छे गुण होते हैं। 4. परीक्षण ÷ इन हाइब्रिड बीजों को खेतों में उगाकर देखा जाता है कि वे कितनी फसल देते हैं, बीमारियों से कैसे लड़ते हैं और मौसम में कैसे टिकते हैं। जो सबसे अच्छे होते हैं, उन्हें किसानों के लिए चुना जाता है। 5. बिक्री के लिए बीज  ÷ जब हाइब्रिड बीज तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें बड़े पैमाने पर बनाकर किसानों को बेचा जाता है। हाइब्रिड फसलों के फायदे   *ज्यादा फसल: सामान्य बीजो...

बायो गैस

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 बायो गैस (गोबर गैस) 🔥 का 🆕 मॉडल🔝 इसमें आप गाय भैंस के गोबर के साथ अपने रसोई का अवशिष्ट (प्याज, आलू etc के छिलके) भी डाल सकते है। बचा हुआ खाना, हरे पत्ते इत्यादि भी काम आएंगे गैस बनाने में इसपे लगी मोटर ग्राइंड करके मिक्स कर देगी जिससे जल्दी गैस बनेगी और स्लरी में निकल जाएगी अवशिष्ट ☑️ इस पर 40% सब्सिडी दी जा रही है भारत सरकार की तरफ से ♦️ इसे कही भी थोड़ी सी जगह में लगाया जा सकता है पोर्टेबल होने के कारण आसानी से इधर उधर कर सकते हैं 👌 तो है न कमाल की चीज